EPFO वेतन सीमा ₹२५,००० और EPS-९५ ऑडिट गाइड २०२६

 


संक्षेप में उत्तर EPFO के अनिवार्य दायरे में आने के लिए वैधानिक वेतन सीमा १७ सितंबर २०२६ से ₹२५,००० प्रति माह कर दी गई है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने १६ सितंबर २०२६ को इसे ₹१५,००० से बढ़ाने की मंजूरी दी, और यह बदलाव राजपत्र अधिसूचना S.O. 5109(E) के माध्यम से अधिसूचित किया गया। सितंबर २०१४ के बाद यह पहला वेतन संशोधन है।

नियोक्ताओं (कंपनियों) को अब सितंबर २०२६ को एक संक्रमण (बदलाव) का महीना मानना होगा: १ से १६ सितंबर की अवधि के लिए पुरानी ₹१५,००० की सीमा लागू होगी, और १७ सितंबर से आगे नई ₹२५,००० की सीमा लागू होगी। महीने के मध्य में हुए इस बदलाव को सुचारू बनाने के लिए, EPFO ने सितंबर महीने के ECR दाखिल करने और अंशदान जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर ३१ अक्टूबर २०२६ कर दी है। पेरोल संरचना, अंशदान गणना और नए कर्मचारियों को शामिल करने की प्रक्रियाओं को इसी अनुसार अपडेट किया जाना अनिवार्य है।

क्या बदला और कौन इसके दायरे में आया?

नया पैमाना जिन कर्मचारियों का वैधानिक वेतन ₹१५,००१ से ₹२५,००० के बीच है और जो पहले अनिवार्य दायरे से बाहर थे, वे अब EPF, EPS और EDLI योजनाओं के अंतर्गत आते हैं। योजना से बाहर रखने का नियम (Exclusion Test) केवल कार्यभार ग्रहण करने (ज्वाइनिंग) की तिथि के वेतन पर लागू होता है; बाद में वेतन में हुई वृद्धि या कुल CTC से यह तय नहीं होता।

जिन मौजूदा सदस्यों का अंशदान पहले अधिकतम ₹१५,००० की सीमा तक सीमित था, उनका अंशदान आधार अब ₹२५,००० तक के वास्तविक वेतन पर स्थानांतरित हो जाएगा। वहीं जो कर्मचारी पहले से ही किसी लागू व्यवस्था के तहत अधिक वेतन पर अंशदान कर रहे थे, उनका अंशदान वास्तविक वेतन पर ही जारी रहेगा।

उच्चतम सीमा पर वित्तीय प्रभाव ₹२५,००० की अधिकतम सीमा पर, अधिकतम EPS अंशदान ₹१,२५० से बढ़कर ₹२,०८३ प्रति माह हो जाता है। इस सीमा पर कर्मचारी का EPF अंशदान ₹१,८०० से बढ़कर ₹३,००० प्रति माह हो जाता है। नियोक्ताओं को पिछले ₹१५,००० के आंकड़ों के बजाय इस संशोधित आधार पर अपने मासिक वैधानिक व्यय की दोबारा गणना करनी चाहिए।

सितंबर २०२६ का संक्रमण काल: नियोक्ताओं के लिए जरूरी बातें

अवधि को विभाजित कर गणना (Split-Period Computation) चूंकि यह संशोधन महीने के मध्य में लागू हुआ, इसलिए EPFO के आधिकारिक FAQ के अनुसार सितंबर २०२६ के अंशदान की गणना दो अवधियों में अलग-अलग की जानी है: १ से १६ सितंबर ₹१५,००० की सीमा पर, और १७ से ३० सितंबर ₹२५,००० की सीमा पर। इन दोनों अवधियों का विवरण एक ही ECR में दर्ज किया जाएगा।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि EPF योजना के पैरा १८ के तहत मासिक वेतन सीमा पूरे सितंबर महीने के लिए ₹२५,००० लागू करने का समर्थन करती है। हालांकि, यह EPFO का आधिकारिक रुख नहीं है। नियोक्ताओं को EPFO के आधिकारिक FAQ का पालन करना चाहिए और चुनी गई गणना पद्धति के दस्तावेज अपने पास सुरक्षित रखने चाहिए।

सितंबर में नए जुड़े कर्मचारी ₹१५,००१ से ₹२५,००० के बीच वेतन पाने वाले जो कर्मचारी पहले EPF के सदस्य नहीं थे, उनकी सदस्यता १७ सितंबर २०२६ से शुरू होती है। उनके सितंबर अंशदान की गणना पूरे महीने के वेतन पर की जाए या केवल १७ सितंबर के बाद के हिस्से पर, इस पर क्षेत्रीय स्तर के दिशा-निर्देशों में भिन्नता हो सकती है। ऐसे कर्मचारियों वाले नियोक्ताओं को अपने संबंधित RPFC कार्यालय से स्पष्टीकरण लेना चाहिए और अपनाई गई प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखना चाहिए।

ECR की बढ़ी हुई समय-सीमा EPFO के १३ अक्टूबर २०२६ के परिपत्र के अनुसार सितंबर २०२६ का ECR दाखिल करने और भुगतान करने की अंतिम तिथि १५ अक्टूबर से बढ़ाकर ३१ अक्टूबर २०२६ कर दी गई है। चूंकि वैधानिक देय तिथि ही बढ़ा दी गई है, इसलिए ३१ अक्टूबर को या उससे पहले किए गए चालान और भुगतान पर धारा ७Q के तहत ब्याज या धारा १४B के तहत विलंब शुल्क नहीं लगेगा। यह छूट केवल सितंबर २०२६ वेतन माह तक ही सीमित है और किसी अन्य महीने की समय-सीमा को प्रभावित नहीं करती।

EPS-९५ उच्च पेंशन: नियोक्ताओं के लिए वर्तमान स्थिति

कोई नया आवेदन विकल्प उपलब्ध नहीं सर्वोच्च न्यायालय के २०२२ के निर्णय के तहत कर्मचारियों के लिए संयुक्त विकल्प (Joint Option) की खिड़की ११ जुलाई २०२३ को समाप्त हो चुकी है और इसे दोबारा नहीं खोला गया है। नियोक्ताओं के लिए वेतन विवरण अपलोड करने की अंतिम तिथि लंबित आवेदनों के अंतिम अवसर के रूप में ३१ जनवरी २०२५ को समाप्त हो गई थी। सरकार ने जुलाई २०२६ में संसद को सूचित किया कि EPFO एक ऑनलाइन सुविधा, गहन सत्यापन, क्षेत्रीय कार्यालयों को दिशा-निर्देश और नियमित निगरानी के माध्यम से न्यायालय के आदेशों को समयबद्ध तरीके से लागू कर रहा है।

नियोक्ताओं के लिए वर्तमान दायित्व नियोक्ताओं के सामने वेतन कार्ड दोबारा अपलोड करने के लिए कोई सामान्य '३० दिन की वैधानिक सीमा' नहीं है। वर्तमान में केवल उन मामलों में EPFO के क्षेत्रीय कार्यालयों से प्राप्त आपत्तियों या नोटिस का उत्तर देना अनिवार्य है, जहाँ अपलोड किया गया वेतन विवरण EPFO के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। EPFO की प्रक्रिया के अनुसार नियोक्ता और कर्मचारी दोनों को सुधार का समय दिया जाता है, और केवल पैरा २६(६) के प्रमाण के अभाव में आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता; RPFC को नियोक्ता से रिकॉर्ड प्राप्त करना आवश्यक है। नियोक्ताओं को EPFO पोर्टल पर लंबित सत्यापन अनुरोधों की निगरानी करनी चाहिए और उनका शीघ्र निपटारा करना चाहिए।

पेरोल संरचना: ऑडिट के मुख्य बिंदु

१. सिस्टम से पुरानी ₹१५,००० की सीमा हटाएं पेरोल सॉफ्टवेयर से पुरानी सीमा हटाकर ₹२५,००० दर्ज करें और सितंबर के लिए दो हिस्सों में गणना की व्यवस्था लागू करें। अक्टूबर २०२६ से पूरे महीने के लिए ₹२५,००० की सीमा लागू होगी।

२. वेतन संहिता धारा २(y) के तहत वेतन की परिभाषा वेतन संहिता, २०१९ के अनुसार (जो २१ नवंबर २०२५ से प्रभावी है और जिसके केंद्रीय नियम ८ मई २०२६ को अधिसूचित हुए), यदि बाहर रखे गए भत्ते कुल पारिश्रमिक के ५०% से अधिक होते हैं, तो वह अतिरिक्त राशि वापस 'वेतन' में जोड़ दी जाती है। यह अतिरिक्त राशि को जोड़ने का नियम है, वेतन के अनुपात पर कोई प्रतिबंध नहीं; नियोक्ता चाहें तो वेतन का अनुपात ५०% से अधिक रख सकते हैं।

३. ज्वाइनिंग के समय पात्रता की जांच कर्मचारी योजना से बाहर है या नहीं, इसकी गणना केवल ज्वाइनिंग की तारीख के मूल वेतन पर की जानी चाहिए, न कि कुल CTC पर। १७ सितंबर २०२६ को या उसके बाद ₹२४,५०० के मूल वेतन पर शामिल होने वाले किसी भी कर्मचारी का नामांकन अनिवार्य है।

ECR मिलान और धारा ७A की तैयारी

EPFO की जांच ECR के आंकड़ों और वित्तीय खातों के मिलान पर आधारित होती है। मुख्य कदम:

  • सार्वभौमिक भत्ता परीक्षण (Universal Allowance Test): विवेकानंद विद्यामंदिर मामले में सर्वोच्च न्यायालय के २०१९ के फैसले के अनुसार, जो भत्ते सभी कर्मचारियों को नियमित और समान रूप से दिए जाते हैं, वे मूल वेतन का ही हिस्सा होते हैं। ऑडिट करें कि कहीं यात्रा भत्ता या उत्पादन प्रोत्साहन को गलत तरीके से बाहर तो नहीं रखा गया है।
  • NCP (अंशदान रहित दिन): Non-Contributory Period की प्रविष्टियों की जांच करें, क्योंकि इनसे EPS सेवा रिकॉर्ड प्रभावित होता है।
  • ठेकेदार (कॉन्ट्रैक्टर) ECR: धारा ८A के तहत ठेकेदार के बकाये के लिए मुख्य नियोक्ता उत्तरदायी होता है। चालान पास करते समय वेंडर के ECR का हर महीने मिलान करें।

दंडात्मक प्रावधान: वर्तमान कानूनी स्थिति

  • धारा ७Q के तहत देय तिथि से वास्तविक भुगतान तक १२% प्रति वर्ष की दर से ब्याज अनिवार्य है और इसे माफ नहीं किया जा सकता।
  • धारा १४B के तहत बकाये के अधिकतम १००% तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है। हालांकि, ९ सितंबर २०२६ को सर्वोच्च न्यायालय ने इस सवाल को एक बड़ी पीठ (Larger Bench) को सौंप दिया है कि क्या अधिकृत अधिकारी के पास धारा १४B के तहत जुर्माना लगाने या न लगाने का विवेकाधिकार है, क्योंकि अदालत ने जुर्माना स्वतः लागू होने की पिछली स्थिति पर संदेह व्यक्त किया है। निर्णय लंबित रहने तक, अदालत का व्यावहारिक रुख यह है कि अधिकारी विशेष परिस्थितियों में राहत देने पर विचार कर सकते हैं, यद्यपि केवल वित्तीय कठिनाई को पहले पर्याप्त आधार नहीं माना गया है। धारा १४B की कार्यवाही का सामना कर रहे नियोक्ताओं को अपने सभी तथ्य आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड पर रखने चाहिए।

कार्य योजना (Action Plan)

१. ₹२५,००० के आधार पर दोबारा गणना करें: जिन कर्मचारियों का मूल वेतन ₹१५,००१ से ₹२५,००० के बीच है, उनकी पहचान करें। संशोधित आंकड़ों के साथ मासिक खर्च का अनुमान अपडेट करें। २. पेरोल सिस्टम अपडेट करें: ₹१५,००० की पुरानी सीमा हटाएं। सितंबर के लिए विभाजित गणना और अक्टूबर से पूरी ₹२५,००० की सीमा लागू करें। ३. सितंबर ECR ३१ अक्टूबर २०२६ तक दाखिल करें: बढ़ाई गई अंतिम तिथि का लाभ लें और सुनिश्चित करें कि ECR में सही गणना दर्ज हो। ४. EPFO पोर्टल की आपत्तियों का समाधान करें: उच्च पेंशन सत्यापन अनुरोधों और विसंगति नोटिसों का प्रमाणित वेतन रिकॉर्ड के साथ तुरंत उत्तर दें। ५. ठेकेदार अनुपालन का ऑडिट करें: फॉर्म ५A और वेंडर के भुगतानों की ₹२५,००० की सीमा के आधार पर जांच करें। ६. कर्मचारियों को सूचित करें: अधिकतम सीमा पर आने वाले कर्मचारियों का हाथ में आने वाला वेतन (Take-home salary) लगभग ₹१,२०० प्रति माह कम होगा। पहले से दी गई जानकारी किसी भी विवाद से बचाती है।

👉 सितंबर २०२६ की EPFO वेतन सीमा पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) डाउनलोड करें: [फ़ाइल देखने के लिए यहाँ क्लिककरें]

अस्वीकरण (Disclaimer): यह गाइड १७ सितंबर २०२६ की राजपत्र अधिसूचना, EPFO परिपत्रों, PIB विज्ञप्तियों और उपलब्ध विशेषज्ञ जानकारी के आधार पर अक्टूबर २०२६ तक की कानूनी स्थिति प्रस्तुत करता है। सितंबर २०२६ की विभाजित गणना और धारा १४B के तहत विवेकाधिकार के मुद्दे अभी न्यायिक समीक्षा के अधीन हैं। यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे कानूनी सलाह न माना जाए। पेरोल को अंतिम रूप देने या EPFO नोटिसों का जवाब देने से पहले नियोक्ताओं को वर्तमान परिपत्रों की पुष्टि करनी चाहिए और किसी योग्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

 

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